फर्रुखाबाद। चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ आठ लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी निर्धारित समय में जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
मामला कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र के तलैया लेन निवासी हसीन खां अफरीदी द्वारा दायर परिवाद से संबंधित है। परिवादी के अनुसार अमेठी जदीद गांव निवासी शानू खां ने उनसे लगभग 5 लाख 53 हजार 500 रुपये के लहंगे तथा अन्य परिधान सामग्री खरीदी थी। सामान की कीमत चुकाने के लिए आरोपी ने 31 जनवरी 2019 की तारीख का एक चेक परिवादी को दिया था।
परिवादी ने जब उक्त चेक को पंजाब नेशनल बैंक की फतेहगढ़ शाखा में भुगतान के लिए जमा किया तो 2 फरवरी 2019 को बैंक ने खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक को अनादरित कर वापस कर दिया। चेक बाउंस होने के बाद परिवादी की ओर से आरोपी को विधिक नोटिस भेजकर निर्धारित समय के भीतर भुगतान करने को कहा गया, लेकिन आरोपी ने न तो रकम का भुगतान किया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया।
इसके बाद परिवादी ने न्यायालय की शरण लेते हुए चेक बाउंस का परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषी करार दिया।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लगाए गए कुल आठ लाख रुपये के अर्थदंड में से 7 लाख 50 हजार रुपये दो माह के भीतर परिवादी को प्रतिकर के रूप में अदा किए जाएं, जबकि शेष 50 हजार रुपये राजकोष में जमा किए जाएंगे। यदि दोषी निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ेगी।


