नई दिल्ली। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से आम लोगों की दिनचर्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदलने जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव बैंकिंग व्यवस्था, कैश लेनदेन और यात्रा सुविधाओं पर पड़ेगा। सरकार द्वारा किए गए इन बदलावों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना है।
सबसे बड़ा बदलाव कैश ट्रांजैक्शन को लेकर किया गया है। अब 10 लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इंडिया की कड़ी नजर रहेगी। पहले यह सीमा 20 लाख रुपये तक थी, लेकिन अब इसे घटाकर 10 लाख कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति वित्तीय वर्ष में इस सीमा से अधिक कैश ट्रांजैक्शन करता है तो उसे आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा सकता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे बड़े लेनदेन के लिए डिजिटल या बैंकिंग माध्यम का उपयोग करें।
बैंकिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एटीएम से हर महीने केवल 5 ट्रांजैक्शन मुफ्त होंगे, इसके बाद प्रत्येक निकासी पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। इसके अलावा यूपीआई के माध्यम से कैश निकालने पर प्रति ट्रांजैक्शन लगभग 23 रुपये तक का शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे डिजिटल यूजर्स को भी कुछ अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ सकती है।
रेलवे यात्रियों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। इंडियन रेलवेज के अनुसार अब ट्रेन छूटने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराने पर 50 प्रतिशत तक रिफंड मिलेगा, जबकि ट्रेन के प्रस्थान के ठीक पहले टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। साथ ही यात्री अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग प्वाइंट बदल सकेंगे, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिलेगी।
इसके अलावा होटल में कैश भुगतान की सीमा भी तय कर दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति एक बार में अधिकतम 1 लाख रुपये तक का नकद भुगतान कर सकेगा। इससे अधिक राशि के भुगतान के लिए डिजिटल या बैंकिंग माध्यम अनिवार्य होगा।
सरकार के इन नए नियमों का उद्देश्य काले धन पर रोक लगाना, वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। आम नागरिकों को इन बदलावों की जानकारी रखना आवश्यक है ताकि वे किसी भी प्रकार की आर्थिक या कानूनी परेशानी से बच सकें।
1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: कैश ट्रांजैक्शन, बैंकिंग और रेलवे सेवाओं पर सीधा असर


