भारतीय वायुसेना की संचार क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने GSAT-7C सैन्य संचार उपग्रह से जुड़ी परियोजना के तहत ₹2,563 करोड़ का करार किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ किया गया है। इसके तहत उपग्रह का डिजाइन, विकास और निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य वायुसेना के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद संचार व्यवस्था को मजबूत करना है।
GSAT-7C की प्रमुख विशेषता सैन्य अभियानों के दौरान सुरक्षित संचार उपलब्ध कराने की क्षमता होगी। इसके जरिए लड़ाकू विमानों, निगरानी विमानों, मानवरहित विमानों और जमीन पर मौजूद सैन्य केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे वायुसेना की विभिन्न इकाइयों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अधिक प्रभावी हो सकेगा।
इस उपग्रह के माध्यम से सामान्य रेडियो संचार की पहुंच से बाहर होने पर भी संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे दूरदराज के क्षेत्रों और कठिन परिस्थितियों में सैन्य संचार की क्षमता बढ़ सकती है। स्वदेशी तकनीक से जुड़े इस प्रोजेक्ट को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
GSAT-7C भारतीय वायुसेना का दूसरा समर्पित सैन्य संचार उपग्रह होगा। इससे पहले GSAT-7A को दिसंबर 2018 में लॉन्च किया गया था, जिसने वायुसेना की संचार जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभाई। नए उपग्रह से सुरक्षित संचार व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, GSAT-7C के प्रक्षेपण की निश्चित तारीख और परिचालन शुरू होने का समय आधिकारिक जानकारी के अनुसार ही स्पष्ट होगा।


