सगे चाचा को 21 गोलियां मार किया था मौत के हवाले, चचेरे भाई के खीचें थे नाखून
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जुर्म और जरायम की दुनिया का दो दसक तक बेताज बादशाह रहा यूपी का टॉप १० माफिया अनुपम दुबे जीवन भर सर्वाधिक अपने ही सजातीयों पर कहर बरपाता रहा। कभी उसने अपने गैंग और भाईयों के साथ सगे चाचा और चाची को ताबडतोड़ गोलियों से भून मौत के घाट उतारा तो कभी उसने अपनी सगी चचेरी बहनों को घर से बेदखल कर दिया। कभी चचेरे भाईयों के बर्बरता पूर्वक नाखून खींच उन्हें अपने खौफ के मायाजाल में भयजदा किया तो कभी गरीब शर्मा बंधुओं को गोलियों से भून मौत के घाट उतारा।
जुर्म की दुनिया का भयाभय चेहरा अनुपम दुबे केवल मार-काट का चेहरा ही नही रहा उसने अपने पडोसियों और कई सजातीयों के घरों की बेटियों के हाथों में मेहदी नही सजने दी। अपने पैत्रक गांव में तो किसी बेटी को हवस का ऐसा शिकार बनाया कि अपने घर की दीबार तोडकर उसका घर ही खुद में मिला लिया और पूरी जवानी उसके हाथ पीले नही होने दिये।
माफिया अनुपम दुबे सीएम योगी की जीरो टालरेंस कार्यवाही में करीब ८२ संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमों और ठेकेदार समीम हत्याकांड में मुख्य आरोपी करार होने के बाद मथुरा की जेल में आजीवन कारावासा की सजा भुगत रहा है तो हाल ही में उसके अपराध के साथी रहे सगे भाई अनुराग दुबे डब्बन और ब्लाक प्रमुख अमित दुबे बब्बन सहित उनके गैंग के ११ बदमाश भी गैगस्टर एक्ट में सलाखों के पीछे हैं।
कोतवाली फतेहगढ़ के समीप माफिया अनुपम दुबे ने अपने भाईयों के दम पर अधिवक्ता रहे संजय मिश्रा के बेशकीमती मकान को न केवल कब्जा किया बल्कि उन्हें सपरिवार जिला छोडने पर मजबूर कर दिया। छिवरामऊ जनपद कन्नौज के चचेरे भाई ऋषभ दुबे पर बर्वर हमले किये यहां तक कि उसके नाखून तक खींचकर उसे अधमरा कर दिया था। जिसका आजतक कोई सुराग नही लगा। सगे चाचा कौशल किशोर दुबे व चाची $कृष्णा दुबे की बर्वता पूर्वक हत्या की। फतेहगढ़ के चर्चित वकील राजीव बाजपेई पर कचहरी प्रांगण में ही कई बार जानलेवा हमले कराये। चलती ट्रेन से पुलिस इंस्पेक्टर को हत्या कर फेंक देने जैसे सनसनीखेज रिकार्ड भी बनाये।
माफिया और उसके गैंग के खौफ के कारण पीडितों ने खुलकर शिकायतें नही की थी।
कन्नौज, फर्रूखाबाद, मैनपुरी अंचल में वर्षो से चर्चित इस गैंग ने सरकारी गैर सरकारी जमीनों पर ताबडतोड कब्जे किये। पडोसी जनपद कन्नौज के थाना सौरिख क्षेत्र में चपुन्ना स्थित करोड़ों की सरकारी जमीन फर्जी अभिलेखों में चढ़वाकर अपने रिश्तेदार धर्मेन्द्र त्रिपाठी उसकी बहू नेहा त्रिपाठी संग गैंग बनाकर कानून व्यवस्था को तार-तार किया।
फतेहगढ़ डबल मर्डर में आज भी बुजुर्ग पिता सदमें में
फतेहगढ़ कोतवाली के निकट गरीब पान विक्रेता के बेटे रज्जन शर्मा और बिन्नू शर्मा को बर्वरता पूर्वक गोलियों से माफिया अनुपम दुबे ने न केवल भून मौत के घाट उतारा था। बल्कि उस दर्ज मुकदमें में फाइनल रिपोर्ट भी अपने प्रभाव के चलते लगवा ली थी। आज तक यही नही पता लगा कि उन दोनों ब्राम्हण समाज के उभरते युवाओं को माफिया के भाईयों ने नही तो किसने मौत के घाट उतारा। छिवरामऊ के अंकित दीक्षित को मौत के घाट उतारा। फतेहगढ के राजीव मिश्रा की जमीन कब्जा कर ली। अपने साथी नॉन प्रक्टिशनर वकील भोलेपुर निवासी अवधेश मिश्रा के जरिए न जाने कितने सजातीयों को झूठे मुकदमों में फंसवाकर उनका आर्थिक शोषण कराया। अपने गैंग के जरिए न जाने कितनी जमीनों पर कब्जे किये।
सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए सेल गठित
शासन प्रशासन ने माफिया पर कार्यवाही करते हुए उसके गैंग पर शिकंजा कसा है। वहीं सोशल मीडिया पर उसके समर्थन और माहौल बनाने वालों के लिए निगरानी मीडिया सेल का गठन किया है।






