
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आज से शुरू हुए भारत-एआई इम्पैक्ट समिट एक्सपो-2026 के उद्घाटन अवसर पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि रोजगार के स्वरूप को बदलेगा और नए अवसरों का सृजन करेगा। उद्घाटन दिवस पर एआई4इंडिया नेतृत्व, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने एआई को मानवता, समावेशी विकास और वैश्विक सहयोग के नए युग की तकनीक बताया।
एआई4इंडिया के सह-संस्थापक आलोक अग्रवाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब नई तकनीक आई है—चाहे वह कंप्यूटर का दौर हो, मोबाइल क्रांति हो या एप आधारित सेवाएं—कुछ पारंपरिक नौकरियां समाप्त हुईं, लेकिन उससे कहीं अधिक नए रोजगार पैदा हुए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समिट भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी एआई राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि इस समिट के लिए देश और दुनिया भर से 2.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जो आयोजकों की अपेक्षा से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है और पंजीकरण पर किसी प्रकार की सीमा नहीं लगाई गई। 19 तारीख को छोड़कर अन्य सभी दिनों में पंजीकृत प्रतिभागी विभिन्न सत्रों में भाग ले सकेंगे, जिसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने समिट को एआई का ‘महाकुंभ’ बताते हुए कहा कि पांच दिवसीय इस आयोजन में दुनिया भर के नेता, टेक विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप, नवोन्मेषक और शोधकर्ता एक मंच पर एकत्र हुए हैं। उन्होंने प्रयागराज के कुंभ से तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह कुंभ आध्यात्मिक संगम का प्रतीक है, उसी तरह यह समिट तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग का संगम है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है।
शुभारंभ से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की शक्ति, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक शोध के कारण भारत एआई परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत जिम्मेदार और समावेशी तरीके से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आज भारत मंडपम में इस पांच दिवसीय समिट का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जिसमें 20 देशों के शासनाध्यक्ष और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सीईओ भाग ले रहे हैं।
ब्रिटेन की ओर से उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंच रहा है। ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि शिखर सम्मेलन में उनका फोकस इस बात पर रहेगा कि एआई कैसे विकास को गति दे, नए रोजगार सृजित करे और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार लाए। ब्रिटेन के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग ने भारत और ब्रिटेन को ‘स्वाभाविक तकनीकी साझेदार’ बताते हुए कहा कि इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी भारतीय आईटी कंपनियां यूके में अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।
वैश्विक दक्षिण में पहली बार आयोजित हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन का आधार तीन प्रमुख सूत्र—मानव, पृथ्वी और प्रगति—हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के उपयोग से लेकर पर्यावरण और जलवायु समाधान तक, इस मंच पर जन-केंद्रित नवाचारों पर विस्तृत चर्चा होगी। एक्सपो में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीकी देशों सहित 13 देशों के पवेलियन लगाए जा रहे हैं। 300 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल और लाइव प्रदर्शन एआई की औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक भूमिका को प्रदर्शित करेंगे।
प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत अपने डिजिटल मॉडल—आधार, यूपीआई और ओपन नेटवर्क—को संतुलित एवं समावेशी विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई पेशेवरों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ेगी और अपनी विशाल युवा आबादी तथा आईटी कौशल के बल पर भारत इस आवश्यकता को पूरा करने वाला प्रमुख स्रोत बन सकता है।






